लोरमी। डीएवी स्कूल कोतरी में डीएवी संस्थान के संस्थापक सह प्रथम अवैतनिक प्राचार्य महात्मा हंसराज की जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर विद्यालय प्रांगण में वैदिक यज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें महात्मा हंसराज जी को याद करते हुए विद्यालय प्राचार्य सहित सभी शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के द्वारा आहुति दी गई।
आयोजित कार्यक्रम में हम दयानंद के सैनिक है, रघुपति राघव राजाराम जैसे भजनों को सभी छात्र - छात्राओं व शिक्षकों ने गाया। इस अवसर पर डीएवी स्कूल कोतरी के प्राचार्य हिमांशु कुनार ने कहा कि महात्मा हंसराज ने जीवनभर एक त्यागी का जीवन बिताया।
वर्षों तक डीएवी की सेवा कर इसे विस्तार देने का कार्य किया। शिक्षा का दीप जलाकर तत्कालीन समाज को एक नई दिशा प्रदान की। आज महात्मा हंसराज हमारे बीच नहीं है, लेकिन 900 से अधिक डीएवी संस्थान उनके जीवित स्मारक के रूप में हमारे बीच उपस्थित है। इस वटवृक्ष की शीतल छाया में लाखों छात्र पुष्पित-पल्लवित हो रहे हैं।
त्यागमूर्ति लाला हंसराज जी के जीवन से प्रेरणा लेकर पूर्ण त्याग एवं समर्पण के भाव के साथ अपनी-अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन हमें करना चाहिए। हंसराज जी ने वर्ष 1886 में लाहौर में जिस डीएवी संस्था का बीजारोपण किया, वो संस्था आज विशाल वटवृक्ष बनकर केवल भारतवर्ष को ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महर्षि दयानन्द की शिक्षाओं से युक्त फल प्रदान कर रहा है और वैदिक शिक्षा पद्धति के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा के माध्यम से मानवता की सच्ची सेवा में संलग्न है।
हमें डीएवी के आदर्शों का पालन करते हुए आर्य जीवन पद्धति को अपनाकर अपना जीवन सफल बनाना चाहिए। कार्यक्रम का संचालन आचार्य डॉ. रूपेंद्र तिवारी ने किया। इस दौरान विद्यालय में समस्त शिक्षक - शिक्षिकाओं व छात्र छात्राओं की उपस्थिति रही।
