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डीएवी भोपालपटनम में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस

उल्लूर (भोपालपटनम)। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस प्रतिवर्ष 1 नवंबर को मनाया जाता है, लेकिन इस वर्ष 1 नवंबर को रविवार होने के कारण डीएवी मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल, उल्लूर में एक दिन पूर्व, 31 अक्टूबर को राज्य स्थापना दिवस समारोह का आयोजन हर्षोल्लास एवं उत्साह के साथ किया गया। इस अवसर पर सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती तथा पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि का भी स्मरण किया गया।

प्रातःकालीन प्रार्थना सभा के दौरान सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके पश्चात छत्तीसगढ़ महतारी के स्वागत एवं सम्मान के साथ छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस समारोह का शुभारंभ हुआ।

समारोह में विद्यालय के रेड, ब्लू, ग्रीन एवं येलो हाउस के विद्यार्थियों ने छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, परंपराओं एवं लोकजीवन पर आधारित आकर्षक छत्तीसगढ़ी नृत्य प्रस्तुत किए। विद्यार्थियों की रंगारंग प्रस्तुतियों ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोकपरंपराओं की सुंदर झलक प्रस्तुत की।

इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षकों ने भी छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। प्राचार्य पी. वेणुगोपाल राव ने अपने संबोधन में छत्तीसगढ़ राज्य के गठन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, राज्य निर्माण की परिस्थितियों एवं स्थापना की प्रक्रिया पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री सहित राज्य के इतिहास से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ दीं तथा इस दिवस के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व से अवगत कराया।

कार्यक्रम के अंतर्गत शिक्षिका सपना गुर्रम द्वारा विद्यार्थियों के लिए छत्तीसगढ़ राज्य पर आधारित सामान्य ज्ञान (जीके) गतिविधि आयोजित की गई। इसमें विद्यार्थियों को छत्तीसगढ़ के इतिहास, भूगोल, संस्कृति, परंपराओं एवं महत्वपूर्ण तथ्यों से संबंधित जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिला।

कार्यक्रम का एक अन्य विशेष आकर्षण छत्तीसगढ़ी पारंपरिक व्यंजनों की प्रदर्शनी रही। इसमें विद्यार्थियों ने अपने घरों से छत्तीसगढ़ के विभिन्न पारंपरिक व्यंजन तैयार कर लाए और उनके आकर्षक स्टॉल लगाए। फर्रा, चीला, भजिया सहित अनेक पारंपरिक व्यंजनों की प्रदर्शनी ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं अभिभावकों ने स्टॉलों पर पहुँचकर पैसे देकर व्यंजनों की खरीदारी की तथा छत्तीसगढ़ी खानपान के पारंपरिक स्वाद का आनंद लिया।

इसके अतिरिक्त छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति, परंपराओं एवं जनजीवन पर आधारित चित्रकला प्रदर्शनी भी आयोजित की गई। विद्यार्थियों ने अपनी कलात्मक प्रतिभा के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान, लोकजीवन एवं परंपराओं को चित्रों में उकेरा।

समग्र रूप से यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए मनोरंजन के साथ-साथ ज्ञानवर्धक एवं सांस्कृतिक अनुभव का माध्यम बना। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को छत्तीसगढ़ के गौरवशाली इतिहास, समृद्ध लोकसंस्कृति, पारंपरिक खानपान एवं कला विरासत से परिचित कराने का प्रयास किया गया। इस आयोजन ने विद्यार्थियों में अपनी माटी, अपनी संस्कृति और अपनी पहचान के प्रति गर्व एवं सम्मान की भावना को और मजबूत किया।

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