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लॉकडाउन में क्या अमीरी के दर्द को मरहम और गरीबी की पीड़ा को केवल सांत्वना


कोरोना संक्रमण के दौर में केन्द्र सरकार लॉकडाउन का हर शहर, गांव, गली, मोहल्लों में सख्ती से पालन कराने राज्य सरकार को लगातार दिशा-निर्देश जारी कर रही है साथ ही हर जरुरी कार्रवाई के लिए पुलिस व प्रशासन को छूट दी जा रही है। कई राज्य सरकारों द्वारा धारा-144 भी लागू किया गया है। लगातार सोशल डिस्टेंसिंग का पाठ पढ़ाया जा रहा है हाथों को सेनेटाइज करने व आवश्यकता पड़ने पर बिना मास्क लगाए घर से बाहर न निकलने की अपील की जा रही हैं। आम आदमी को किसी भी प्रकार के आयोजनों की अनुमति नहीं है। अनावश्यक कार्यों के लिए घरों से बाहर निकलने पर डंडे बरसाना, उठक-बैठक, धूप में बैठाना, वाहन जब्त करना इत्यादि कार्य किए जा रहे हें साथ ही जो व्यक्ति जहां है उसे वहीं रहने का निर्देश जैसे तमाम क्रियाकलाप देखने मिल रहे हैं।


चलिए ये सभी कार्रवाई नियम के पालन के लिए जरुरी भी है लेकिन सवाल यह है कि ये कार्रवाई सभी के लिए है या केवल उस वर्ग के लिए जो दिन रात मेहनत करके दो वक्त का खाना भी ठीक से नहीं खा पाता। ये सवाल तब उठता है जब प्रतिदिन मेहनत करके खाने वाला व्यक्ति चाहकर भी घर से बाहर नहीं निकल सकता, जरुरी होने पर भी अपने रिश्तेदारों के सुख-दुख में शामिल नहीं हो सकता। स्थिति ऐसी भी है कि सुविधा के अभाव में अचानक तबीयत बिगड़ने से व्यक्ति या तो घरों के अन्दर या अस्पताल पहुंचने से पहले बीच रास्ते में दम तोड़ने पर मजबूर हैं। कई जगहों पर बच्चे अपने मां-बाप और मां-बाप अपने बच्चों के अंतिम दर्शन तक को तरस जा रहे हैं। स्वाथ्यकर्मी, सुरक्षाकर्मी, सफाईकर्मी, मीडियाकर्मी व अन्य अपने छोटे-छोटे बच्चों को घर में छोड़कर अपनी जान जोखिम में डालकर निस्वार्थ भाव से दिन-रात लोगों की सेवा कर रहे हैं और आप क्या कर रहे हैं अमीरी के दर्द को मरहम और गरीबी की पीड़ा को केवल सांत्वना दे रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी जी ने सर्वप्रथम 24 मार्च को 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा की थी, तब से लेकर अब तक उन्होने 4 बार देश के नाम संबोधन दिया है अपने चौथे संबोधन (14 अप्रैल) में उन्होने लॉकडाउन 19 दिन और यानि 3 मई तक बढ़ाने की घोषणा की थी। इस दौरान शुरुआत से लेकर अब तक लॉकडाउन के पालन की बात करें तो मौजूदा आकड़े दर्शाते हैं कि अन्य देशों की तुलना में भारत में लॉकडाउन अब तक सफल तो हुआ लेकिन उम्मीद से कम, कुछ गलतियां भी हुई जिसका खामियाजा आज भुगतना पड़ रहा है।

· पीएम की अपील के बाद भी भीड़, न मास्क न सोशल डिस्टेंस


पिछले दिनो प्रधानमंत्री के ऐलान के बाद केन्द्रीय गृह मंत्रालय की ओर से लॉकडाउन 2.0 को लेकर गाइडलाइन्स जारी की गई जिसके अनुसार विभिन्न सेवाओं जैसे- विमान सेवा, पैसेजर ट्रेन, मेट्रो सर्विस, बस सर्विस, औद्योगिक व शैक्षणिक गतिविधियों पर रोक के साथ-साथ सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक, मनोरंजन, खेल, शिक्षा से जुड़े किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम को मंजूरी नहीं दी गई। खुशी के कार्यक्रम तो छोड़िए यहां तक अंतिम संस्कार जैसे अनिवार्य शोक कार्य के लिए तक 20 से अधिक लोगों की मौजूदगी पर रोक लगाई गई है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए ऐसा करना जरुरी था कुछ को छोड़ दे तो लगभग सभी लोग इसका पालन कर रहे हैं। लेकिन वहीं भारत के पूर्व पीएम एचडी देवेगौड़ा के पोते और कर्नाटक के पूर्व सीएम एचडी कुमारस्वामी के बेटे की शादी में शुक्रवार 17 अप्रैल के दिन 100 से ज्यादा लोग पहुंचे। न किसी ने मास्क पहना न सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया, उल्टे पूर्व मुख्यमंत्री ने समर्थकों से कहा- सबको बुलाना चाहता था, पर माफी चाहता हूं।

प्रवासी मजदूरों के भीड़ से उड़ी थी लॉकडाउन की धज्जियां


मुंबई के बांद्रा इलाके में 14 अप्रैल को लॉकडाउन तोड़ते हुए हजारों की संख्या में प्रवासी मजदूर इकट्ठा हो गए थे, सोशल डिस्टेंसिंग तो यहां दूर-दूर तक नहीं था और ये अपने-अपने गांव जाने की मांग कर रहे थे। पुलिस को भीड़ हटाने लाठीचार्ज करना पड़ा। यहां लॉकडाउन की धज्जियां उड़ी थी जबकि अन्य राज्यों की तुलना में महाराष्ट्र में संक्रमण सर्वाधिक है। पूरी घटना के बाद सीएम उद्धव ठाकरे तक को सफाई देनी पड़ी कि लॉकडाउन का मतलब लॉकअप नहीं होता, पाबंदियां हटने के बाद सभी को घर भेजने का इंतजाम किया जाएगा।


महाराष्ट्र सरकार के शीर्ष अधिकारी की लापरवाही


जहां एक ओर लोगों को अपने घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं है वहीं दूसरी ओर कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन के बीच बीते दिनो महाराष्ट्र सरकार के शीर्ष अधिकारी की ओर से लापरवाही का मामला सामने आया था। यहां गृह विभाग के प्रधान सचिव के तौर पर पदस्थ आईपीएस अमिताभ गुप्ता ने डीएचएफएल के प्रमोटर कपिल और घीरज वाधवान के परिवार के लिए इमरजेंसी पास जारी किया। सीबीआई और ईडी से बचने वे इसी पास से 21 लोगों के साथ अपने फार्म हाउस जा रहे थे। पुलिस ने परिवार के खिलाफ लॉकडाउन के नियम तोड़ने पर केस दर्ज किया।


सख्त लॉकडाउन के बीच यूपी सरकार ने भेजी 252 बसें


प्रधानमंत्री ने लॉकडाउन फेज-2 की घोषणा के साथ यह भी कहा कि 20 अप्रैल से सख्त शर्तों के साथ कुछ जरुरी सेवाएं शुरु की जा सकती है लेकिन नियम की अनदेखी की गई तो छूट खत्म की जा सकती है। इसलिए 20 अप्रैल तक के समय को और ज्यादा महत्वपूर्ण बताया था। इस दौरान राज्य सरकारों को सख्ती से लॉकडाउन का पालन कराने के निर्देश दिए गए हैं ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। इसके बावजूद राजस्थान कोटा में रहकर कोचिंग करने वाले छात्रों के लिए शुक्रवार उत्तरप्रदेश सरकार ने 252 बसें भेजी। सुबह बसों के आने की सूचना के बाद छात्र बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर आएं और सोशल डिस्टेंस की धज्जियां उड़ गई। यहां यूपी के करीब 8 हजार छात्र हैं, जिन्हे बसों से उनके घरों तक पहुंचाया जाएगा। हालांकि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस पर नाराजगी जताई और कहा यह नाइंसाफी है बसें भेजने से लॉकडाउन का महत्व ही खत्म हो जाएगा। शुक्रवार को संक्रमण के 6 नए मामलों के साथ कोटा में रहकर मेडिकल की तैयारी करने वाला एक छात्र भरतपुर में संक्रमित मिला। रिपोर्ट आने के बाद से छात्र जिस हॉस्टल में रहता था उसके सभी बच्चों को आइसोलेट कर छात्र के कमरे को सील कर दिया गया है। कोटा में अब तक 92 से अधिक संक्रमित मिल चुके हैं।


केमिकल से नहलाकर किया मजदूरों की जिंदगी से खिलवाड़


एक ओर हजारों किलोमीटर की पैदल यात्रा कर किसी तरह अपने राज्य तक पहुंचने वाले मजदूरों को राज्य की सीमा में ही रोक दिया जा रहा है कैंप में रहने की व्यवस्था की जा रही है, इसके अलावा करीब डेढ़ हफ्ते पहले तो बरेली के सेटेलाइट बस स्टैंड पर बाहर से आए लोगों को बैठाकर उनके ऊपर सैनेटाइजर सोडियम हाइपोक्लोराइट का छिड़काव जैसी शर्मनाक घटना सामने आयी थी। छिड़काव से पहले उन्हे आंख बंद करने कहा गया फिर केमिकल की बारिश कर दी गई थी। इन लोगों में महिलाएं ओर बच्चे भी थे जिनकी आंखों में जलन होने लगी। जिंदगी से खिलावाड़ करने वाले इस विडियो के वायरल होने के बाद बरेली डीएम ने संज्ञान लेते हुए कहा कि कर्मचारियों को बाहर से आने वाले बसों को सैनेटाइज करने कहा था लेकिन उन्होने अतिउत्साह में ऐसा किया। मामले पर केंद्रीय स्वास्थय मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि डीएम इस पर एक्शन ले रहे हैं। वहीं इस घटना के बाद कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने आपदा के खिलाफ लड़ाई में अमानवीय काम न करने की बात कही। इसीलिए यह ख्याल दिमाग में बार-बार आता है कि क्या हमेशा अमीरी के दर्द को मरहम और गरीबी की पीड़ा को केवल सांत्वना ही मिलती रहेगी।



केस अध्ययनः-

www.bhaskar.com

www.hindi.oneindia.com

www.m.punjabkesari.in

www.amarujala.com

उपरोक्त समाचार पत्रों के वेबसाइट व ई-पेपर में प्रकाशिक समाचारों का अध्ययन और स्वयं के विचारों के समावेश से यह लेख तैयार किया गया है। इस लेख के माध्यम से मैने लॉकडाउन के दौरान आमजन को होने वाली समस्याओं का पक्ष रखने का प्रयास किया है। किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए यह लेख नहीं लिखा गया है।

  




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4 Comments
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  1. बेहतरीन👌👌,जरूरत पड़ेगी तो इसमें से कुछ शब्द लूंगा भी

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    1. शुक्रिया आपका.. बिल्कुल। ��

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  2. क्या बात Corona त्रासदी को कितने सरल और सहज शब्दों में लिखा है आप बेशक बड़े राइटर मालूम होते हैं..

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    1. राइटर बड़ा या छोटा नहीं होता वो बस राइटर होता है लेकिन शुक्रिया आपका।

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